मंत्रियों का भ्रष्‍टाचार अब आएगा सामने, सूचना आयोग ने दिया बड़ा फ़ैसला..

केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को केंद्रीय सूचना आयोग ने कैबिनेट में मौजूद सभी केंद्रीय मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में आई की शिकायतों की जानकारी सार्वजनिक करने का आदेश जारी किया है। जानकारी के मुताबिक एक आरटीआई अर्जी पर पीएमओ की आपत्तियों को गलत ठहराते हुए केंद्रीय सूचना आयोग ने यह आदेश जारी किया है।

भ्रष्टाचारी मंत्रियों की आएगी अब शामत

आपको बता दें कि सूचना का अधिकार के तहत भारतीय वन सेवा के 2002 बैच के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने साल 2017 में पीएमओ में आरटीआई डालते हुए केंद्रीय मंत्रियों के खिलाफ जून 2014 से लेकर अर्जी देने तक की तारीख तक मिली भ्रष्टाचार की शिकायतों के संबंध में जानकारी मांगी थी। जिसके जवाब में साल 2017 के दौरान पीएमओ ने कहा था कि यह सूचना व्यापक और अस्पष्ट है और साथ ही सीआईसी के एक पुराने आदेश का हवाला देते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया था।

सूचना आयोग ने लगाई पीएमओ को फटकार

इसके बाद पीएमओ ने एक बार फिर आरटीआई एक्ट के अनुच्छेद 7 (9) का हवाला देते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद आरटीआई कार्यकर्ता संजीव चतुर्वेदी ने केंद्रीय सूचना आयोग से ही गुहार लगाई थी। अब इस मामले में सूचना आयोग ने पीएमओ पर कार्रवाई करते हुए उन्हें 15 दिन के अंदर संजीव चतुर्वेदी को उनकी आरटीआई के तहत जानकारी उपलब्ध करवाने के आदेश जारी किए हैं।

भ्रष्टाचारी नेताओं और कालेधन संबंधित ये डाली गई थी आरटीआई

जानकारी के लिए आपको ये भी बता दें कि संजीव चतुर्वेदी ने अपनी आरटीआई में यह भी पूछा था कि पीएम मोदी के वादों के मुताबिक विदेशों से कितना कालाधन लाया गया और इसकी कितनी धनराशि देश के लोगों में बांटी गई। विदेशी बैंकों में पड़े कालेधन को वापिस लाने के लिए क्या-क्या प्रयास किए गए हैं। लेकिन कालेधन से संबंधित सूचना को पीएमओ ने आरटीआइ की परिभाषा के दायरे से बाहर बता दिया था।

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